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विदेश मंत्री एस। जयशंकर और उनके इरानी समकक्ष जिस्म जरीफ
– फोटो: एएनआई

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ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिका से जारी तनाव के बीच इरानी विदेश मंत्री जिस्म जरीफ ने कहा, भारत खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है क्योंकि वह एक महत्वपूर्ण पक्ष है। ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा स्थिति बेहद खतरनाक हैं।

रायसीना डायलॉग के दूसरे दिन बुधवार को जरीफ ने अमेरिका पर प्रोमोखिलाफी करने और आंतरिक नियमों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और आतंकी संगठन आईएस सुलेमानी की हत्या के जश्न मना रहे हैं। आज आईएस के खिलाफ नई गठबंधन बनाना जरूरी है। तालिबान के खिलाफ अभियान छेड़ने वाला अमेरिका आज अफगानिस्तान से निकलने के लिए आईएस के साथ प्रतिबद्ध कर रहा है। समलैंगिक पर उसने मनमर्जी चलाई।

जरीफ ने सुलेमानी पर अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, अमेरिका पश्चिम एशिया को अपनी एक खास निगाह से देखता है। यहां की जनता की निगाह से नहीं। जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ईरान में 90 लाख लोग सड़कों पर उतरे। रूस, भारत सहित चार देशों के लोग भी इसके विरोध में उतरे। भारत में तो 430 शहरों में प्रदर्शन हुआ। अमेरिका को अपने नजरिये में बदलाव लाने की जरूरत है। जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ईरान की कार्रवाई आत्मरक्षा के लिए थी।

जरीफ ने बेलारूस एर्न्स को मार गिराने के लिए खेद व्यक्त किया और कहा कि यह तनाव के कारण हुआ। जरीफ ने कहा कि सुलेमानी की याद में ईरान की सड़कों पर लगभग नौ लाख लोग उतरे थे। आप इतने लोगों को विरोध करने के लिए नहीं ला सकते हैं। एक विमान का नीचे गिरना एक धुंध था। 180 परिवार के बारे में अपने लोगों के उद्घाटन का शोक मना रहे हैं। यह तनाव के कारण हुआ।

अमेरिका के साथ बातचीत में कोई विकल्प नहीं

ईरान द्वारा समलैंगिक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमले के कुछ देर बाद यह विमान हादसा हुआ था। यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा संकट के कूटनीतिक समाधान का मौका है, जरीफ ने अमेरिका के साथ बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है।)जरीफ ने कहा कि ईरान कूटनीति में दिलचस्पी रखता है। हमें अमेरिका के साथ बातचीत में कोई पसंद नहीं है।

इस दौरान विदेश मंत्री एस। जयशंकर ने भारत के तटस्थ रहने का संदेश दिया। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के संबंध में उन्होंने कहा कि दोनों स्वायत्त देश हैं। ऐसे में दोनों देशों को अपने फैसले लेने का अधिकार है। जाहिर तौर पर आखिर में वही होगा जो दोनों देश करेंगे। इस दौरान ईरान के विदेश मंत्री जरीफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की।

रूस के विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूट्ससी) में भारत की स्थायी सदस्यता की पुरजोर वकालत की। लोवरोव ने कहा कि भारत और जेसन जैसे देशों को यूश्तसी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। रायसीना डायलॉग में लावरोव ने कहा, ब्रिक्स पर फैसला लेने के महत्व के मुद्दे जी -7 तय नहीं कर सकते। यह जी -30 होना चाहिए। भारत और जेसको को निश्चित रूप से यून्टसी का स्थायी सदस्य होना चाहिए।

सार

  • ईरान के विदेश मंत्री जिस्म जरीफ ने कहा, खाड़ी क्षेत्र में स्थिति बेहद खतरनाक है
  • अमेरिका-ईरान के बीच स्थिति बेहद खतरनाक, भारत को महत्वपूर्ण पक्ष बताया
  • अमेरिका पर प्रोमखिलाफी करने व आंतरिक नियम तोड़ने का आरोप लगाया गया
  • सुलेमानी पर अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश के आरोप खारिज किए गए

विस्तार

ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिका से जारी तनाव के बीच इरानी विदेश मंत्री जिस्म जरीफ ने कहा, भारत खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है क्योंकि वह एक महत्वपूर्ण पक्ष है। ईरान और अमेरिका के बीच मौजूदा स्थिति बेहद खतरनाक हैं।

रायसीना डायलॉग के दूसरे दिन बुधवार को जरीफ ने अमेरिका पर प्रोमोखिलाफी करने और आंतरिक नियमों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और आतंकी संगठन आईएस सुलेमानी की हत्या के जश्न मना रहे हैं। आज आईएस के खिलाफ नई गठबंधन बनाना जरूरी है। तालिबान के खिलाफ अभियान छेड़ने वाला अमेरिका आज अफगानिस्तान से निकलने के लिए आईएस के साथ प्रतिबद्ध कर रहा है। समलैंगिक पर उसने मनमर्जी चलाई।

जरीफ ने सुलेमानी पर अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, अमेरिका पश्चिम एशिया को अपनी एक खास निगाह से देखता है। यहां की जनता की निगाह से नहीं। जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ईरान में 90 लाख लोग सड़कों पर उतरे। रूस, भारत सहित चार देशों के लोग भी इसके विरोध में उतरे। भारत में तो 430 शहरों में प्रदर्शन हुआ। अमेरिका को अपने नजरिये में बदलाव लाने की जरूरत है। जनरल सुलेमानी की मौत के बाद ईरान की कार्रवाई आत्मरक्षा के लिए थी।


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