Connect with us

पर्व-त्यौहार

Happy Dussehra 2023: दशहरे का इतिहास , दशहरे का अर्थ और दशहरा कैसे मनाया जाता है ?

Published

on

Happy Dussehra 2023

दशहरा एक प्रसिद्ध हिन्दू त्योहार है। जो अच्छाई की बुराई पर जीत की ख़ुशी में मनाया जाता है। इसे विजय दशमी के नाम से भी जाना जाता है। हमारे देश में दशहरा का त्योहार बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है।पूरे देश में दशहरे को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। जैसे पूर्व और उत्तर पूर्व में  दुर्गा पूजा और विजयदशमी के नाम से मनाते हैं, उत्तरी, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रों में इसे दशहरा नाम से जाना जाता है। Happy Dussehra 2023 : असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा 24 अक्टूबर दिन शुक्रवार को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा.

दशहरे का इतिहास (Happy Dussehra 2023) :-

भगवान राम को अपनी माता को दिए हुए एक वचन के कारण १४ वर्ष के वनवास पर जाना पड़ा था। जब राम वन के लिए गए तो उनके साथ उनकी पत्नी माता सीता और उनके भाई लक्ष्मण भी  उनके साथ गए।  वन में श्रीराम को देखकर लंका के राजा रावण की बहन सरुपनखा श्रीराम पर मोहित हो गयी और उसने श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। श्रीराम ने सूर्पनखा को बहुत ही सम्मान से बताया कि वह उनसे विवाह नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी सीता को वचन दिया है कि वह उनके बीना किसी और से विवाह नहीं करेंगे। यह कहकर श्रीराम ने सूर्पनखा को लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण के पास जाकर सूर्पनखा विवाह करने की हठ करने लगीं तो लक्ष्मण ने उन्हें मना कर दिया। इस पर सूर्पनखा नहीं मानी तो लक्ष्मण ने क्रोधित होकर उसकी नाक काट दी। रोती हुई सूर्पनखा अपने भाई रावण के पास पहुंची और उसे राम और लक्ष्मण के बारे में बताया। तब रावण ने अपनी  बहन के अनादर का बदला लेने के लिए छल से माता सीता का हरण कर लिया।अपनी पत्नी को बचाने और संसार से रावण की बुराई का नाश करने के लिए दशहरे के दिन राम जी ने रावण का वध किया था।इसके अलावा बहुत से लोग मां दुर्गा द्वारा महिषासुर नाम के राक्षस का वध करने की खुशी में भी दशहरा  मनाते हैं ।

May be an image of text that says 'HAPPY Dussehra बुराई पर अच्छाई की जय हो, अधर्म पर धर्म की जीत हो, असत्य पर सत्य की जीत हो. अन्याय पर न्याय की विजय हो.'

दशहरा का अर्थ (Meaning of Dussehra) :-

बुराई का प्रतीक दस सर वाला रावण इस दिन हारा था इसलिए इसे दशहरा और लोक भाषा में दसहारा भी कहते हैं। दशहरा शब्द दो संस्कृत शब्दों से आया है – दशाजो रावण के दस सिरों  वाली बूराई का प्रतीक है, और हारा‘, जिसका अर्थ है पराजित करना ’ , दशहरा  रावण रूपी ‘ बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

माना जाता है कि लंका पर जीत हासिल करने  से पहले राम ने शक्ति  की ९ दिन तक आराधना की थी। तभी से ९ दिन के नवरात्र की पूजा की शुरुआत हुई ।

इस दिन पांडव अर्जुन ने अपने सैनिकों के साथ मिल कर सभी कुरु योद्धाओं को हराया था। दशहरे के दिन ही देवी अपराजिता की पूजा की जाती है ।

May be an illustration

माँ दुर्गा :-

दुर्गा पूजा या विजयदशमी में मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का जश्न मनाया जाता है।इस असुर ने देवताओं को भी स्वर्ग से भगा दिया था। इसके अत्याचार से पृथ्वी पर हाहाकार मचा हुआ था|

Happy Dussehra 2021माँ दुर्गा ने सभी देवताओं और आम लोगों को इस असुर के आतंक से मुक्ति दलाई थी। इसके बाद सभी देवताओं ने देवी की इस विजय पर उनकी पूजा की थी।जबकि दशहरे में भगवान राम द्वारा रावण के वध का उत्सव मनाया जाता है। इसका कारण और कथा त्रेतायुग से जुड़े हैं। त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। दशहरा के दिन मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा-अर्चना की जाती है।

May be an image of text that says 'A ERESH समाचार तरफ HAPPY DUSSEHRA दशहरे का अर्थ दशा = दस सर वाली बुराई हारा = पराजित करना'

श्री राम मर्यादा और आदर्श के प्रतीक हैं। वहीं, मां दुर्गा शक्ति का प्रतीक हैं। ऐसे में जीवन में शक्ति, मर्यादा, धर्म आदि  विशेष महत्व है। अगर किसी व्यक्ति के अंदर यह गुणता है वह सफल जरूर होता है। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।

शस्त्र-पूजा :-

भारत की रियासतों में शस्त्र पूजन धूम-धाम से मनाया जाता हैं। इस दिन लोग शस्त्र-पूजा करते हैं और नया काम की शुरुआत करते हैं। हथियारों की साफ-सफाई की जाती है| ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए जाने वाले कामों का शुभ फल अवश्य प्राप्त होता है। यह भी कहा जाता है कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस दिन शस्त्र पूजा करनी चाहिए। हमारी सेना आज भी इस परंपरा को निभाती है और विजय दशमी के दिन अस्त्र-शस्त्र की पूजा करती है

Happy Dussehra 2023

दशहरा कहा कहा मनाया जाता है :-

यह त्योहार सारे भारत में मनाया जाता है जिनमें सबसे अलग कुल्लू, हिमाचल प्रदेश और मैसूर कर्नाटक के उत्सव हैं। इसके अलावा भी भारत में नौ दिन चलने वाला दुर्गोत्सव दशहरे के दिन अपने चरम पर पहुंच जाता है। मैसूर में तो मां महिषासुर मर्दिनी को समर्पित यह त्योहार अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में तब्दील हो चुका है। नवरात्रि का पावन पर्व दशहरे से कुछ समय पहले ही शुरू हो जाता है । इन नौ दिन दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। इन दिनों में भक्त माता की चौकी सजाते हैं और दुर्गा पाठ भी अपने घरों में कराते हैं। पूरे नौ दिनों तक बाजारों में भी रौनक रहती है | नेपाल में इसे दशईं के रूप में मनाया जाता है ये हिंदू लूनी-सौर कैलेंडर के अश्विन महीने के दसवें दिन मनाया जाता है| दुर्गा पूजा भारतीय राज्यों असम, बिहार, झारखण्ड, मणिपुर, ओडिशा, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में व्यापक रूप से मनाया जाता है जहाँ इस समय पांच-दिन की  छुट्टी रहती है। बंगाली हिन्दू और आसामी हिन्दुओं के पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा में यह वर्ष का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। यह न केवल सबसे बड़ा हिन्दू उत्सव है बल्कि यह बंगाली हिन्दू समाज में सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से सबसे महत्त्वपूर्ण उत्सव भी है। पश्चिमी भारत के दिल्ली, उत्तर प्रदेश , महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, कश्मीर, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में भी दुर्गा पूजा का उत्सव मनाया जाता है।

Happy Dussehra 2023

दशहरा कैसे मनाया जाता है :-

दशहरे  के दिन कई घरो में श्रीराम की पूजा  करने का रिवाज़ होता है जिसमे श्रीराम को भोग अर्पित करते है। भारतीय लोग पार्षद के लिए चावल की गुड़ , खीर के चावल , बूंदी के लड्डू बनाते है। महाराष्ट्र में कङ्कणी पार्षद बनाया जाता है यह एक मीठा और नमकीन व्यंजन है।

May be an image of 9 people

दशहरे के समय पर रावण , रावण के भाई कुंभकर्ण और रावण के पुत्र मेघनाद  के बड़े बड़े पुतले लगाए जाते है , जिन को शाम के समाये जलाया जाता है ऐसा  कहा जाता है की इनके पुतलों को बना कर जलाने  से आप अपने अन्दर के राक्षश को भी ख़तम कर देते है। हिन्दू रिवाज़ो की मुताबिक , नवरात्रे के नौ दिनों के समाये रामलीला के नाटक खेले जाते है जिनका अंत दशहरे के दिन रावण के पुतले को जला कर ख़त्म करने से होता है। 

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

धर्म

Mahavir Jayanti 2022: महावीर जयंती तिथि , महत्व

Published

on

By

Mahavir Jayanti 2022

Mahavir Jayanti 2022 जैन धर्म में महावीर जयंती सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। महावीर जयंती का त्योहार दुनिया भर में जैन लोगों द्वारा मनाया जाता है। इस दिन उनके जन्मदिन की खुशी में भक्ति यात्रा निकाली जाती है। इस साल महावीर जयंती 14 अप्रैल, गुरुवार को है।

महावीर जयंती का इतिहास

छुट्टी चैत्र के हिंदू महीने के वैक्सिंग (बढ़ते) के 13 वें दिन मनाया जाता है जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में होता है।

महावीर जयंती बुद्ध के समकालीन महावीर और 24 वें और अंतिम तीर्थंकर (महान संत) के जन्म का जश्न मनाती है।

मूल रूप से वर्धमान के नाम से जाने जाने वाले महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व या 615 ईसा पूर्व में हुआ था। जैन धर्म के दिगंबर मत का कहना है कि भगवान महावीर का जन्म 615 ईसा पूर्व में हुआ था, लेकिन श्वेतांबरों का मानना ​​है कि उनका जन्म 599 ईसा पूर्व में हुआ था। हालांकि, दोनों संप्रदायों का मानना ​​है कि महावीर सिद्धार्थ और त्रिशला के पुत्र थे।

किंवदंती के अनुसार, ऋषभदेव नाम के एक ब्राह्मण की पत्नी देवानंद ने उसे गर्भ धारण किया, लेकिन देवताओं ने भ्रूण को त्रिशला के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया।

श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार, माना जाता है कि गर्भवती मां ने 14 शुभ स्वप्न देखे थे। (दिगंबर संप्रदाय के अनुसार यह 16 स्वप्न थे)। ज्योतिषियों ने इन सपनों की व्याख्या की और भविष्यवाणी की कि बच्चा या तो सम्राट या तीर्थंकर होगा।

एक दशक से अधिक समय तक, वह एक तपस्वी थे, घूमते थे, भोजन के लिए भीख माँगते थे, और कम पहनते थे। फिर उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया, तीर्थंकर बने और अपनी मृत्यु से 30 साल पहले तक पढ़ाया।

जैन धर्म का वर्तमान तपस्वी धर्म महावीर को उनके प्रमुख पैगंबर के रूप में उलट देता है। 3.5 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा प्रचलित, जैन धर्म। वे सभी जीवों के प्रति अहिंसा के मार्ग का अनुसरण करते हैं। कुछ लोग सांस लेते समय अनजाने में किसी कीट को मारने की संभावना को रोकने के लिए फेस मास्क पहन सकते हैं।

महावीर जयंती कैसे मनाई जाती है?

महावीर जयंती प्रार्थना और उपवास के साथ मनाया जाने वाला त्योहार है। यह अवकाश पूर्वी राज्य बिहार में विशेष रूप से लोकप्रिय है, जहां महावीर का जन्म आधुनिक शहर पटना के पास हुआ था। पारसनाथ मंदिर, कलकत्ता में एक बड़ा उत्सव आयोजित किया जाता है।

Continue Reading

न्यूज़

Baisakhi 2022 : बैसाखी 2022, महत्व , समारोह

Published

on

By

Baisakhi 2022

वैसाखी (बैसाखी) 2022

हिंदुओं और सिखों के बीच मनाया जाने वाला, वैसाखी  Baisakhi 2022 एक वसंत फसल उत्सव है जो हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन का ऐतिहासिक महत्व काफी पेचीदा है। ऐसा माना जाता है कि सिखों के 10वें गुरु गोविंद सिंह ने इसी दिन प्रसिद्ध खालसा पंथ की स्थापना की थी।

बैसाखी 2022 कब मनाया जाता है?

बैसाखी हर वर्ष 14 अप्रैल को विभिन राज्यों हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, पंजाब में बड़ी धूम धाम से मनाई जाती है

बैसाखी का ऐतिहासिक महत्व

कहानी यह है कि वैसाखी पर, गुरु गोबिंद सिंह ने किसी भी सिख को चुनौती दी थी जो अपनी जान देने के लिए तैयार था। लगभग एक हजार लोगों की भीड़ में, कुल मिलाकर पांच लोगों ने स्वेच्छा से भाग लिया। गुरु ने स्वयंसेवकों को मारने के बजाय, उन्हें “अमृत” के साथ बपतिस्मा दिया और “खालसा” नामक संत-सैनिकों के पांच सदस्यीय समूह का गठन किया। खालसा का प्रतिनिधित्व करने वाले इन पांच पुरुषों को केश (बाल), कत्चेरा (अंडरवियर), कंघा (कंघी), कृपाण (तलवार) और कारा (स्टील की अंगूठी) का प्रतीक पांच के रूप में जाना जाता था। उस घातक दिन के बाद, सिखों के औपचारिक बपतिस्मा के दौरान अमृत या “अमृत” का छिड़काव एक आम बात हो गई है।

ऐतिहासिक महत्व के अलावा, यह दिन रबी की फसल के पकने का भी प्रतीक है और पंजाब के लोगों के बीच इसे धूमधाम से मनाया जाता है।हालाँकि, हिंदू धर्म में, वैसाखी को नए साल के दिन के रूप में मनाया जाता है और भारत के कुछ राज्यों में इसे भव्यता के साथ मनाया जाता है।

भारत में बैसाखी कैसे मनाई जाती है ?

गुरुद्वारों को विभिन्न रंगों की रोशनी से सजाया जाता है, जबकि सिख “नगर कीर्तन” का आयोजन करते हैं – पांच खालसा के नेतृत्व में एक जुलूस। जुलूस को सिख ग्रंथों से भजन गाते लोगों द्वारा चिह्नित किया जाता है। कुछ बड़े जुलूस सम्मान के रूप में गुरु ग्रंथ साहिब की एक प्रति रखते हैं।

पंजाब की सच्ची संस्कृति को दर्शाने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पारंपरिक लोक नृत्य या भांगड़ा, अनिवार्य रूप से एक फसल उत्सव नृत्य, इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में काफी आम है। लोग स्थानीय मेलों में आते हैं जो पंजाबी संस्कृति का एक अभिन्न अंग हैं।

भारत के अन्य हिस्सों में, हिंदू इस दिन को नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं। लोग दिन की शुरुआत करने से पहले पवित्र गंगा और अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाते हैं। पारंपरिक पोशाक पहनना, स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ उठाना और दोस्तों और रिश्तेदारों के घर जाना काफी आम है। नया उद्यम शुरू करने के लिए भी वैसाखी का दिन शुभ माना जाता है।

Baisakhi 2022 वैशाखी पूरे भारत में मनाई जाती है, भले ही अलग-अलग राज्यों में नाम अलग-अलग हों। त्योहार को सभी के लिए समृद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

बैसाखी 2022 समारोह

त्योहार मनाने के लिए लोग नाचते हैं, गाते हैं और नए कपड़े पहनते हैं। वे इस दौरान होने वाली परेड देखने का आनंद लेते हैं। स्त्री और पुरुष दोनों नृत्य करते हैं। पुरुष बंगरा रूप का प्रदर्शन करते हैं जबकि महिलाएं घटना को मनाने के लिए गिद्दा रूप का प्रदर्शन करती हैं। लोग छुट्टी का खाना और मिठाइयाँ तैयार करते हैं और आपस में बाँटते हैं। यह सिखों के लिए एक विशेष दिन रहा है, जो जुलूस निकालते हैं और इस दिन को बड़ी कट्टरता के साथ मनाते हैं। वैसाखी भारत के उत्तरी राज्यों हरियाणा और पंजाब में भव्य रूप से मनाया जाता है।

सिख सुबह जल्दी उठते हैं, स्नान करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और विशेष प्रार्थना करने के लिए निकटतम गुरुद्वारे में जाते हैं। सामूहिक प्रार्थना के बाद वहां मौजूद सभी लोगों को कड़ा प्रसाद बांटा जाएगा। उसके बाद, वे स्वयंसेवकों द्वारा परोसे जाने वाले लंगा का आनंद लेते हैं। यह त्योहार स्कूलों, कॉलेजों और खेतों में भी मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

गुरुद्वारा वैशाखी की वास्तविक सुंदरता को धारण करने वाले सर्वोत्तम स्थान हैं। वे पूरी तरह से सजाए गए हैं और कई लोगों को आकर्षित करने के लिए कीर्तन आयोजित करते हैं। वैसाखी Baisakhi 2022 के दौरान भी यही समारोह होने की उम्मीद है।

बैसाखी के अनुष्ठान 2022

एक आम प्रार्थना में भाग लेने के लिए सुबह सिखों द्वारा गुरुद्वारों का दौरा किया जाएगा। ग्रंथ साहिब को दूध से स्नान कराया जाएगा। उपस्थित लोगों को मिठाई बांटी जाएगी। दोपहर के समय सिखों द्वारा ग्रंथ साहिब की परेड निकाली जाएगी। त्योहार का सार्वजनिक परिवहन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। त्योहार की घटनाओं के कारण, सार्वजनिक परिवहन के कार्यक्रम में गड़बड़ी हो सकती है।

बैसाखी Baisakhi 2022 मनाने के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

अमृतसर: यदि आप वैसाखी 2022 मनाने के लिए सबसे अच्छी जगह की तलाश में हैं, तो अमृतसर शहर की यात्रा करने पर विचार करें। वास्तव में, यह हर साल हजारों सिखों द्वारा दौरा किया जाता है। शहर का स्वर्ण मंदिर वह स्थान है जहां सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा की नींव रखी थी। आगंतुक दिन में विशेष प्रार्थना करते हैं।

दिल्ली: भारत की राजधानी दिल्ली, इस दिन को मनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती है। इसमें देश के सभी हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। लोग विशेष प्रार्थना करने और त्योहार की शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए गुरुद्वारों में इकट्ठा होते हैं। दिल्ली भी वैसाखी पार्टियों का आयोजन करती है। इस जगह पर भी विचार करें।

पंजाब: यदि आप वास्तविक उत्सव देखना चाहते हैं, तो वैसाखी 2022 के दौरान पंजाब जाने पर विचार करें। दिल्ली की तरह, राज्य में नृत्य और गायन संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। त्योहार का भोजन रेस्तरां द्वारा परोसा जा रहा है। राज्य का भ्रमण अवश्य करें।

हरियाणा: हरियाणा हर साल एक विशाल मेला आयोजित करता है। बहुत से लोग इस राज्य में वैसाखी मेले में भाग लेने के लिए आते हैं, जो बहुत प्रसिद्ध है। इसके अलावा स्कूली बच्चों के लिए कई प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। शाम को वयस्कों के लिए गायन और नृत्य प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।

चंडीगढ़: चंडीगढ़ इस त्योहार के दौरान सबसे अधिक देखी जाने वाली जगहों में से एक है। पर्यटक शहर के गुरुद्वारों में जाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं। हरियाणा की तरह ही वे शाम के समय गायन और नृत्य संगीत का आनंद ले सकते हैं।

जालंधर: जालंधर शहर वैशाखी को आकर्षक रूप से मनाता है। मुख्य उत्सवों में नृत्य, गायन आदि शामिल हैं। पुरुष और महिला दोनों लोक नृत्य करते हैं। यह देखने के लिए एक दावत है।

 

Continue Reading

न्यूज़

Ram Navami 2022 : राम नवमी 2022

Published

on

By

Ram Navami 2022

राम नवमी एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो कि हर साल चैत्र महीने के नौवें दिन (हिंदू कैलेंडर में पहला महीना) मनाया जाता है –  Ram Navami 2022 इस साल यह 10 अप्रैल को पड़ेगी । भगवान राम के जन्म का सम्मान करने के लिए हिंदू राम नवमी मनाते हैं। क्या आप जानते हैं कि हिंदू मानते हैं कि भगवान राम सर्वोच्च भगवान हैं और दुनिया भर में रहने वाले सभी हिंदुओं के दिलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं ?

राम नवमी का इतिहास

राम नवमी अयोध्या के राजा दशरथ को भगवान राम के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। यह ज्ञात है कि राजा दशरथ की तीन रानियाँ थीं, कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। तीनों रानियां बहुत लंबे समय तक एक बच्चे को जन्म नहीं दे सकीं।

राजा दशरथ ने एक पवित्र अनुष्ठान किया जिसे “पुत्रकामेष्ठी यज्ञ” के रूप में जाना जाता है, जिसे एक ऋषि वशिष्ठ ने सुझाया था। अनुष्ठान में, राजा ने अपनी सभी पत्नियों को एक बच्चा होने की इच्छा को पूरा करने के लिए ‘पायसम’ परोसा। नतीजतन, राजा को हिंदू महीने के नौवें दिन चित्रा के रूप में एक बच्चे का आशीर्वाद मिला। रानी कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया, जबकि अन्य रानियों ने लक्ष्मण और भरत को जन्म दिया।

राम नवमी Ram Navami 2022 हिंदू समाज में उच्च और निचली जातियों के लोगों द्वारा मनाई जाने वाली पांच प्रमुख छुट्टियों में से एक है। भगवान राम को हिंदू भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। हालांकि इस दिन को कई भारतीय राज्यों में छुट्टी के रूप में घोषित किया जाता है, लेकिन इसे अलग-अलग दिनों में मनाया जाता है। हिंदू इस दिन को मंदिरों में जाकर, उपवास करके और भगवान राम का आशीर्वाद लेने के लिए मनाते हैं। यह वसंत त्योहार स्पष्ट रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत के विचार को बढ़ावा देता है।

राम नवमी के बारे में पांच रोचक तथ्य 

राम को पूर्णता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है 

राम को रामचंद्र के रूप में भी जाना जाता है और उन्हें पूर्णता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जो अपने परिवार के प्रति अपनी सभी जिम्मेदारियों को पूरा करते हैं।राम का जन्म दोपहर में हुआ था

दंतकथा के अनुसार, यह ज्ञात है कि राम का जन्म अयोध्या में दोपहर के समय हुआ था।

राम के भाई-बहन

राम जी के तीन भाई थे, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न।

राम ने सीता से विवाह किया

राम ने सीता से विवाह किया जो विदेह के राजा की पुत्री थी।

रामायण में राम की कथा लिखी गई है

राम की पूरी कहानी रामायण में लिखी गई है, जो एक प्राचीन भारतीय संस्कृत ग्रंथ है, जो हिंदू शास्त्र का एक हिस्सा है।

 

Continue Reading

Trending

Copyright © 2022. All Rights Reserved Fresh Samachar