कर्नाटक में कन्नड़, हिंदी समेत अन्य भाषाओ को सम्मान दर्जा दे।

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बेंगालुरू के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने सोमवार को कन्नड़ को बढ़ावा देने का वायदा किया। हितधारकों ने राज्य सरकार से कन्नड़ और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को हिंदी और अंग्रेजी के समान आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के लिए केंद्र पर जोर देने का अनुरोद किया।

कार्यकर्ताओं ने एक कोंस्टीटूशनल अमेंडमेंट के माध्यम से केंद्र सरकार को सभी 23 अन्य भाषाओ को ऑफिशल दर्जा देने की मांग करी। वह विधान सभा  में एक प्रस्ताव पारित करना चाहते हैं, जिसमे भाषाओ को बराबर दर्जा देने की मांग करी जाएगी ।

क्या कहता है आर्टिकल 343 ?  

संविधान के आर्टिकल 343 में कहा गया है कि यूनियन की ऑफिशल भाषा अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी होगी और अब केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक कामो के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है। भाषा कार्यकर्ता चाहते हैं कि कन्नड़ सहित सभी अन्य भाषाओ को समायोजित करने के लिए इसमें बदलाव किया जाए। वे चाहते हैं कि आर्टिकल 351, जो कहता है कि हिंदी को बढ़ावा देना केंद्र सरकार का कर्तव्य है, को रद्द किया जाए।

भाषा को उच्च दर्जा दिलाने की रणनीति।

ग्रैगा चटर्जी, संस्थापक ट्रस्टी, कैंपेन फॉर लैंग्वेज इक्वलिटी एंड राइट्स ने कहा कि कानून हिंदी भाषा की तरफ ज्यादा झुका हुआ है, वह सभी सांसदों  से संपर्क कर रहे हैं और एक नया बिल संसद में पास करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह बेंगलुरु में एक मीटिंग आयोजित करेंगे और कर्णाटक सरकार को भी इस मीटिंग में शामिल होना चाहिए। इस बीच, कन्नड़ विकास प्राधिकरण, कन्नड़ भाषा के बिल का एक ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। जिसमें राज्य प्रशासन में कन्नड़ को लागू करने और इसे बढ़ावा देने के लिए सामान्य नियम बनाने का विचार किया गया है। केडीए के अध्यक्ष टीएस नागभरण ने कहा, कि वह चाहते हैं कि सरकार आने वाले बेलगावी सेशन में भाषा को प्रेरित करे और राजभाषा नीति में परिवर्तन वाला एक प्रस्ताव पास करें।

कन्नड़ के लोगो को मिलेगा न्याय, सरकार।

जी आनंद, अध्यक्ष, बनवासी बालागा, जो कन्नड़ के हित में बोल रहे हैं। उन्होंने भी मुख्यमंत्री से आर्टिकल 343 में परिवर्तन करने की मांग करी और कहा कि  उन्हें एक प्रस्ताव पास करना चाहिए। जवाब में कन्नड़ एंड कल्चर मिनिस्टर व. सुनील कुमार ने कहा की सरकार इसपर खास ध्यान देगी। हालांकि यह एक संवैधानिक परिवर्तन से जुडी हुई है, इसीलिए किसी भी तरह की प्रक्रिया शुरू करने से पहले इसे समझना जरूरी है। वह कन्नड़ और उनके लोगो को न्याय दिलाने के लिए गंभीर रूप से सोचेंगे।

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